डांक्टरोंके हडतालसे ओपीडी सेवा ठप्प, स्वास्थ्य मन्त्रालय है बेखबर

खबरी न्यूज, जनकपुरधाम । संघीय सरकारद्धारा किया गया डांक्टरोंके   समायोजके विरोधमे सरकारी डांक्टरों ने आकस्मिक सेवा बाहेकका सम्पूर्ण सेवा बन्द कर विरोधमे उतरे है ।

डांक्टरोंके हडतालसे ओपीडी सेवा ठप्प, स्वास्थ्य मन्त्रालय है बेखबर

नेपाल संघीयातामे जानेके बाद संघ, प्रदेश और स्थानीय तह अर्थात तीनो तहमे डांक्टरोंको समायोजन कर पठाने के निर्णय विरुद्ध ओ लोग आन्दोलित हुवे है । अभि देशभरका सरकारी डांक्टर सब आकस्मिक सेवा बाहेकका काम बन्द करके हडतालमे उतरे है जिससे सेवाग्राही रोगी कठिन समस्यामे फस गया है ।

सरकार ने अति आवश्यक सेवाके क्षेत्रमे कोई भी बन्द, हडताल नहि कर सक्ता घोषणा करनेके तुरन्त बाद स्वास्थ जैसा सम्बेदनशील क्षेत्रमे कार्यरत सरकारी डांक्टर लोगो ने आन्दोलनका घोषणा किया है । डांक्टरों ने उपचार सेवा अवरोध कर आन्देलनमे उतरनेके बाद साधारण जनता देशभरके अस्पतालसे ओपीडी सेवा से बञ्चित होगया है । जिस कारण रोगीओं का उपचार नहि होसका ।
सरकार ने चैत १४ गते ( २८ मार्च ) को मन्त्रिपरिषदके बैठक से अति आवश्यक क्षेत्रमे कोई भी बन्द, हडताल नहि कर सक्ता निर्णय करते हुवे राजपत्रमे सूचना प्रकाशित करनेका निर्णय किया था । मन्त्रीपरिषदके निर्णण अनुसार टेलीफोन, जल, स्थल वा हवाई यातायात, रेलमार्ग, पर्यटन, होटल, एलपी गैस, अस्पताल एम्बुलेन्स, औषधी उत्पादन, फोहर व्यवस्थापन, विजुली–पानी, दैनिक खाद्यय पदार्थ सहितका क्षेत्रमे अब से बन्द, हडताल नहि कर सक्ता व्यवस्था किया गया है ।

लेकिन सरकारके इस निर्णयको चुनौती देते हुवे डांक्टरों ने आन्दोलन घोषणा किया है, उनलोगो ने कर्मचारी समायोजनमे असन्तुष्टी जताते हुवे शुक्र दिनसे सरकारी अस्पतालका इमरजेन्सी सेवा बाहेक सम्पूर्ण सेवा बहिष्कार किया है । सरकारी चिकित्सकोंका मांग है कि हमे संघीय सरकारके मातहतमे रखना पडेगा । चिकित्सकोंकी इस हडतालसे देशभरके अस्पताल प्रभावित होकर आकस्मिक बाहेकका सेवा बन्द किया है । चिकित्सकोंका कहना है कि संघीय सरकार अपने मातहतमे रखकर प्रदेश और स्थानीय तहमे परिचालन किया जाय । सरकारी चिकित्सक संघ ( गोडान ) का अध्यक्ष डा. दीपेन्द्र पाण्डेके अनुसार सरकार ने हम चिकित्सक लोगोको निजामती कर्मचारी सरह समायोजन करना चाहता है जो अन्यायपूर्ण है और इसी निर्णयको हमलोग विरोध कररहे है । उन्होने कहा हमलोग प्रदेश और संघमे जानेके लिए तैयार है लेकिन जीवनभरके लिए प्रदेश और संघमे ही रहनेकी बाध्यता प्रति हमारी आपत्ति है । इतनी बडी असमानताके साथ हमलोग सेवा प्रवाह नहि कर सकते अध्यक्ष पाण्डेका कहना है ।

इससे पहले भी आन्दोलित हुवे सरकारी चिकित्सकोंको प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली ने फागुन १८ गते ( २ मार्च ) मांग सम्बोधन किया जायगा सो अश्वसान दिए थे । प्रधानमन्त्रीके प्रतिबद्धताके बाद चिकित्सकों ने आन्दोलन स्थगित हुआ था । सरकारी चिकित्सकको असमान तरीकासे समायोजन कर स्थानीय तहमे अपनेसे छोट ओहदाके कर्मचारी मातहत रहनेका व्यवस्था करनेके विरोधमे चिकित्सक है । अभि देशभरमे १ हजार ४ सय सरकारी चिकित्सक कार्यरत है ।

Previous
Next Post »