How is Yarsagumba and why is it worth so much?

How is Yarsagumba and why is it worth so much?

 

कैसा होता है यार्सागुम्बा और क्यो है इसकी इतनी किमत

( How is Yarsagumba and why is it worth so much? )

नेपालके हिमाली क्षेत्रमे पाये जानेवाला यार्सागुम्बा एक प्रसीद्ध जडिबुटीके रुपमे जाने जाते है । हिमाली क्षेत्रके उचाईयों पर पाये जानेवाले ईस जडिबुटीको हिमाली भियाग्रा भी कहा जाता है ।

यार्सागुम्बा एक एसी जडिबुटी है जिसमे बनस्पति और जीव दोनो पाये जाते है । हिमाली भेगके शेर्पा, भोटे लोग इस अमुल्य जडिबुटीका संकलन और प्रयोग सालाें से करते आ रहे है ।

शेर्पाली भाषामे इसे यार्चा गुम्बु कहा जाता है । जिसका अर्थ यार्चा वनस्पति और गुम्बु किरा होता है । बनस्पति और किरा एक साथ होनेके कारण इसे नेपाली प्रचलित भाषामे यार्सागुम्बा कहा जाता है । स्थानीय लोग ठण्डके मौसममे अपना घर छोडकर ठण्डको परबाह नकरते हुवे हिमाली भेगके जंगल मे पंडाल लगाकर इसे खोजते रहते है ।

इसे आयुर्वेदिक जडिबुटीके श्रेणीमे रखा गया है । आयुर्वेदमे इसका सेवन से होनेवाला फाइदाके बारेमे उल्लेख किया गया है, आयुर्वेदके अनुसार इसके सेवन से गुर्देकी बिमारी और यौनजन्य शक्तिमे अधिक फाइदा होता है और नोक्सान न के बराबर होता है । अर्थात इसका साइड इफेक्ट नहि होता है ।

क्युकि यार्सागुम्बाके सेवन से यौनजन्य शक्तिमे इजाफा होनेके कारण इसे हिमाली भियाग्रा नाम से भी जाना जाता है । यार्सागुम्बा की किमत हजार रुपिये नहि बल्कि लाखौं रुपैयें किलोग्राम है । हिमाली भेग के लोग इसे संकलन करके रखते है और जरुरतमंद लोग लाखौं रुपैया किमत देकर इसे खरीदते है ।

मजे की बात तो ये है कि दिन प्रति दिन यार्सागुम्बा की मांगे बढती जा रही है, वैसे तो यह जडिबुटी भारत के हिमाली क्षेत्रमे भी पाया जाता है लेकिन इसके खरीद–बिक्री पर भारतीय सरकार द्धारा रोक लगाने के बाद चोरी–छीपी इसका व्यापार चल रही है । पहले नेपाल सरकार ने भी इसके बिक्री–वितरण पर प्रतिबन्ध लगाया था लेकिन अब प्रतिबन्ध हटा लिया गया है ।

ढण्ड के मौसममे यह पाया जाता है और इसे खन्ती वा हाथ से ही गढा खोदकर जमीनके भितर से कीरा सहितका यह जडिबुटी बाहर निकाला जाता है । खुदाइ करके निकाला गया यार्सागुम्बा को सफाई करने बाद कुछ समयके लिए इसे सुखाकर प्रयोगमे लिया जाता है । सुखनेके बाद इसे पावडर बनाकर सेवन किया जाता है ।

समुद्र सतहसे ३ हजार ८ सय मीटर से लेके ४ हजार ८ सय मीटर तक के उचाईमे पाये जानेवाले भौरे रंगका ये किरा औसतन दो से चार इन्च तक लम्बा होता है । कहा जाता है कि संकलन के क्रममे लाखौं के संख्यामे जिवाणु किरा छुट जाता है जो मिटी पर गिरकर सुषप्त अवस्थामे पडा रहता है और इसी से नयाँ यार्सा बनता है ।

यार्सागुम्बा को क्यो कहा जाता है हिमाली भियाग्रा

( Why Yarsagumba is called Himali Biagra )
वैसे तो चिनियाँ उपचार पद्धतिमे यार्सागुम्बा के प्रयोग प्राचीनकाल से होता आ रहा है । लेकिन इसे गुमनाम रखा गया था । १९९३ मे जर्मनीमे हुवे विश्व ट्रयाक एन्ड फिल्ड प्रतियोगितामे चीनका तीन महिला खेलाडी ने विश्व रेकर्ड कायम करने के बाद इसका रहस्य बाहर आ सका । 

चिनियां महिला खेलाडी के उत्कष्ट प्रदर्शनके जिज्ञासा मे प्रशिक्षक ने दैनिकी अभ्यास के रुपमे यार्सागुम्बा सेवन करनेका रहस्य खोल्नेके बाद इसका चर्चा विश्वभर मे होने लगा था ।

हालही मे हुेवे एक बैज्ञानिक अनुसन्धान से प्रमाणित हुआ है कि यार्सागुम्बा मे कोर्डिसेपिक एसिड, कोर्डिसेपिन लगायत न्युक्लेओसाइड, एमिनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट, भिटामिन, पोलिसाक्काराइड, सुगर, असन्तृप्त फ्याटी एसिड, स्टोरोल, प्रोटीन और मेलानि जैसा रासायनिक पदार्थ पाया जाता है । 

और इसमे पाये जानेवाले कुछ रासायनिक तत्व से क्यान्सर और ट्यूमर के उपचार मे मदत मिल सकता है । 

यार्सागुम्बा क्यो है इतना महगां  ( Why is Yarsagumba so expensive )

विक्री–वितरण के लिए नेपाल से विदेशी बजार के लिए यार्साग्ुम्बा चीन लगायत, हङकङ, सिंगापुर, अमेरिका र जापान तक पहुच रहा है । अब इसका विक्री–वितरण तस्करी के माध्यम से होने लगा है जो ६० लाख किलोग्राम के दर से अन्तर्राष्ट्रीय बाजार मे विक्री करते है । इतना ही नहि अब तो इन्टरनेट के माध्यम से भी इसका खरीद–विक्री हो रहा है । 

विश्व मे जितना यार्सागुम्बा खपत होता है उस मध्ये एकेला चिन ही ९५ प्रतिशत बजार पर कब्जा किया है । जबकि नेपाल का दो से तीन प्रतिशत ही बजार रहा है । 

विभिन्न संचार माध्यम के अनुसार २००४ से २०१८ तक मे चीनमे इसका बजार भाउ डेढ हजार प्रतिशत से ज्यादा बृद्धि हुआ है और नेपालमे इसका बजार मुल्य दो हजार प्रतिशत से ज्यादा बढी है । 

क्या ? यार्सागुम्बा सेवन से मिलता है निरोगी काया

(what ? Yarsagumba intake gives healthy body)

वैसे तो यार्सागुम्बा के सेवन करना साधारण बात नहि है, क्यो कि यह इसका इतना किमत है कि साधारण लोग इसका उपयोग करही नहि सकता । लेकिन यार्सागुम्बा को शारिरीक टाँनिक को साथही सर्वगुण सम्पनन जडिबुटी के रुप मे जाना जाता है ।

विभिन्न रोगों के आयुर्वेदिक उपचार के रुपमे इसका प्रयोग किया जाता है जैसे ः–अश्थमा, टीवी, श्वास सम्बन्धी कोई भी रोग हो इसक सेवन किया जा सकता है । पर्वतिय क्षेत्रमे इसको आयुर्वेदका अमृत भी कहा जाता है ।





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