भक्तिमय जनकपुर, शक्तिमय जनकपुर I bhaktimay janakpur, shaktimay janakpur

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भक्तिमय जनकपुर, शक्तिमय जनकपुर I bhaktimay janakpur, shaktimay janakpur

हिन्दुओं का महान पर्व विजया दशमी चहल–पहल हरेक जगह व्यापक रुपमे देखा जा सकता है । हाल जनकपुर नगर विजया दशमी के रमझम मे रंग गयी है । विजया दशमी की उत्साह एवं हर्षोल्लास नगरवासी के चमकता हुआ चेहरा से प्रष्ट होता है ।

वडा दशैं के अवसर मे जनकपुर लगायत विभिन्न शक्तिपीठों को रंगरोगन, गेट पंडाल निर्माण सहित का सर–सजावट से दुल्हीन की तरह सजाने की परम्परा अब प्रचलन मे आ चुका है । जनकपुर के दशमी विगत कुछ सालों से दर्शनार्थी, श्रद्धालु और पर्यटकों सहित के लिए आकर्षित गन्तव्य स्थल बन चुका है ।

राम मन्दिर मे अवस्थित तत्कालीन मिथिला का राजा जनक की कुल देवी राजदेवी की भव्य रुपमे मनाने जाने वाली पूजा विधि ही इस आकर्षण का केन्द्र है । विजया दशमी के मुख्य आकर्षक केन्द्र के रुपमे रहा प्रसीद्ध शक्तिपीठ राजदेवी मन्दिर मे घटस्थापना से लेकर दशमी भर भोर से सांम तक पूजा–अर्चना करने के लिए श्रद्धालु भक्तजनों को भीड लगा रहता है । 

मान्यता है कि शक्तिपीठ राजदेवी के दर्शन एवं पूजा–पाठ का अपना अलग महत्व रहा है । इस बार राजदेवी मन्दिर की सर–सजावट के काम विशिष्ट रुपमे किया गया समस्त नगरवासी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है ।

इस मे भी मन्दिर के चारो तरफ किया गया सजावट दर्शनार्थीओं बीच चर्चा का विषय बना हुआ है । महावीर युवा कमिटी के सक्रियता मे स्थानीय श्रद्धालु भक्तजनों सहज रुपमे माता की दर्शन और पूजा–अर्चना करने की मौका प्राप्त करते है । 

उस एवज मे कमिटी को साधुवाद देना नहि भुलते है । विगत के तुलना मे इस बार अति विशिष्ट रुपमे राजदेवी मन्दिर को सजाई गयी है फिर भी गत साल से कम खर्च हुआ महावीर युवा कमिटी ने जानकारी दिया । 

मन्दिर के भितर प्रांगण मे थाई रुपमे ही चदरा के छावनी निर्माण किया गया है और ९ हजार ५ सय वर्गफिट मे मार्बल लगाने के काम सहित मन्दिर के अस्थाई डेकोरेशन मे भी कम खर्च हुआ कमिटी का कहना है ।

पहले गेट पंडाल निर्माण, विजलीवती लगायत के विभिन्न सजावट मे १५ लाख से ज्यादा खर्च हुआ करता था लेकिन इस बार करीब ९ लाख रुपैया खर्च होने का अनुमान किया गया है । स्थानीय व्यापारी द्धारा दिया गया चन्दा और बली प्रदान के आम्दानी से उक्त खर्च किया जाता है । 

कमिटी के अनुसार मन्दिर गुढी संस्थान के मातहत मे रहने के बाबजुद भी विजया दशमी के तैयारी मे गुढी संस्थान द्धारा आर्थिक सहयोग उपलब्ध नही कराया जाता है । साथ ही मन्दिर व्यवस्थापन के लिए डेढ करोड से अधिक लागत के निर्माण किया गया थाई संरचना मे भी गुढी द्धारा आर्थिक सहयोग नही किया गया कमिटीका कहना है । 

इस सम्बन्ध मे बात किये जाने पर गुढी संस्थान का कार्यालय प्रमुख ने प्रक्रिया नही मिल्ने के कारण गुढी विजया दशमी मे आर्थिक सहयोग नही कर सका स्वीकार किये साथ ही उन्होने कहा की राम मन्दिर के पूजा–अर्चना सहित का सालभर का सम्पूर्ण खर्च गुढी संस्थान द्धारा ही दिया जाता है । 

माता के दर्शन के लिए राजदेवी मन्दिर के दक्षिण द्धार से नव प्रदेश द्धार का निर्माण किया गया है तो पश्चिम द्धार से बाहर निकलने की व्यवस्थापन करने के बाद श्रद्धालु भक्तजनों की अधिक भीड होने के बाबजुद भी माता की दर्शन मे दर्शनाभिलाषीओं राहत महसुस कर रहे है । 

पहले प्रवेश औ निकलने का द्धार एक ही होने से माता की दर्शन करने मे असुविधा एवं अवरोधका सामना करना परता था । राजदेवी मन्दिर प्रांगण मे भारतीय भजन मण्डली द्धारा हरेक सांम झाँकी सहित भजन किर्तन किया जाता है । 

बौद्धी माता, अमरखना माता तथा राम मन्दिर के दक्षिण और पूर्वपटी के पंडाल, बिजुली वती, सर–सजावट सहित का जिम्मेवारी बहन करते आ रहे राम युवा कमिटी अपना जिम्मेवारी पूरा करने के लिए पूर्ण सजग देखा जा सकता है । 

व्यापारी और बली प्रदान के आम्दानी से राम युवा कमिटी लाखौं रुपैया खर्च करके अमरखना और  बौढी माई के ज्वाइन्ट सडक मे पीसीसी ढलान, अमरखना मन्दिर मे भव्य गेट के निर्माण एवं सामूदायिक भवन के स्थाई संरचना निर्माण करने मे सफल हुआ है ।

कमिटी रामसागर पोखरी मे घाट निर्माण के योजना मे लगे है और जल्द ही निर्माणका काम शुभारम्भ होगा कमिटी द्धारा जानकारी दिया गया है । दर्शनार्थीओं के मनोरजंन के लिए साम ७ बजे से रात ११ बजे तक कमिटी के प्रांगण मे भारत और जनकपुर के स्थानीय भजन मण्डली द्धारा विशुद्ध भजन संध्या कार्यक्रम होता है । 

महाअष्टमी के दिन बोका के लाइन लगाने और व्यवस्थापन की मुख्य जिम्मेवारी राम युवा कमिटी को ही होता है । इस के लिए अधिक संंख्या मे स्वयं सेवक परिचालन करना होता है तो बोका लेकर लाइन मे लगा लोगों को राम युवा कमिटीद्धारा निशुल्क भोजन की व्यवस्था किया जाता है । 

शक्ति आगमन की प्रत्यक्ष मान्यता होने से भी दशमी मे देवी के विभिन्न स्वरुप की विशेष पूजा–आराधना किया जाता है । विजया दशमी देवी की विभिन्न स्त्रोत्रों की साधना के समय होने के कारण साधकों दशमी भर साधना मे लीन रहते है । 

सामान्य अवस्था के श्रद्धालु भक्तजनों शक्ति प्राप्ती के लिए दशमीभर राजदेवी मन्दिर लगायत विभिन्न शक्तिपीठों मे अथवा अपना घरमे दुर्गा सप्तशती के पाठ सहित विभिन्न देवी–देवता के नियम पूर्वक पूजा–अर्चना करते है । इस क्षेत्र की प्रसीद्ध शक्तिपीठ राजदेवी माता के घटस्थापना से लेकर दशमी भर विशेष पूजा–आराधना करने की प्राचीन परम्परा रहा मान्यता है । 

घटस्थापना से लेकर दशमी भर विधि विधान से भव्यता का साथ होते आ रहे राजदेवी माता की पूजा–अर्चना सम्बन्धमे राम मन्दिर के महन्थ राम गिरी दास वैष्णव द्धारा दिए गए जानकारी अनुसार घटस्थापना के दिन राजदेवी माता की मुल पीण्ड ( पीडी ) नजदीक एक स्थान मे जमरा उगाने के लिए जौं बो कर कलश स्थापना किया जाता है । 

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उसी तरह बौद्धी माता मे कलस स्थापना होता है लेकिन अमरखना माता के मन्दिर मे कलश स्थापना की परम्परा नही है । घटस्थापना से दशमी भर भक्तजना एवं दाताओं द्धारा संध्या आरती की आयोजन होता है ।  

महन्थ गिरी के अनुसार घटस्थापना से पंचमी तक साल भर होते आरहे नियमित विधि विधान अनुसार ही माता की पूजापाठ होता है । और पंचमी के दिन ही भैरव के आव्हान के रुपमे वटुक भैरव के ध्वजा स्थापना की जाती है । राजदेवी मन्दिर मे बटुक भैरब के स्थापना होने के बाद ही इस क्षेत्र के अन्य शक्तिपीठों मे बली प्रदान की शुरुवात हुआ मान्यता है ।  

इस तरह षष्टी के दिन नागरिक समाज, राम युवा कमिटी और महावीर युवा कमिटी सहित स्थानीय विभिन्न कमिटी का सहयोग एवं मन्दिर का पुजारी, श्रद्धालु भक्तजन, नगरवासी एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन और नेपाली सेना के सहभागिता मे गाजा–बाजा सहित विषहरा कुटी के नजदीक रहा बेल बृक्ष को आमंत्रण कर चामुण्डा देवी की आव्हान कर बेल नौती कार्यक्रम सम्पन्न किया जाता है । 

सप्तमी के दिन माता राजदेवी को विशेष सिंगार किया जाता है । और आज ही के दिन नगरवासी अपना–अपना घर से आरती लाकर माता की विशेष आरती करने की प्राचीन परम्परा रहा है । आज का दिन देवी पूजा के विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है । 

आमंत्रित किया गया बेल को तोडकर बेलतोरी सम्पन्न किया जाता है । नागरिक समाज, विभिन्न युवा क्लब, मन्दिर के महन्थ, पुजारी, श्रद्धालु नगरवासी, स्थानीय प्रशासन और नेपाली सेना के विशेष सहभागिता मे बेलतोरी सम्पन्न होता है । 

बेलतोरी के लिए मन्दिर से बाहर निकलते वक्त एक राउण्ड गोली सांकेतिक रुपमे पुलिस द्धारा हवाई फायर कर सलामी दिया जाता है । कुछ बेल पत्र और एक जोडा बेल तोडकर मन्दिर भितर लाया जाता है । 

इसी तरह महाअष्टमी के रात ( निशा पूजा ) के बाद बली प्रदान की परम्परा अनवरत रुपमे जारी है । लगभग सांम साढे ६ बजे से बली प्रदान शुरु होती है और सुबह ४ बजे तक अनवरत रुपमे जारी रहता है । 

बली प्रदान के बाद मन्दिर को अच्छी तरह साफ–सफाई की जाती है और ९ बाहुन पंडीत द्धारा हवन पाठ ( चण्डी पाठ ) किया जाता है । आज ९ स्वरुप की भगवती की कुमारी भोजन और १ कुमार को भैरब के रुपमे दही चुरा, मिष्ठान भोजन कराया जाता है । साथ ही उन सबों को नव वस्त्र और भोजन दक्षिणा दान दिया जाता है । 

आव्हान किया गया देवी–देवता को मन्त्रद्धारा विसर्जन किया जाता है तो सुवह १०–११ बजे भगवती नजदीक के जमरा एवं टीका सर्वसाधारण भक्तजनों को वितरण होता है । 

उस दिन सुबह राम–जानकी के डोला राम मन्दिर से निकल कर धनुष सागर को परिक्रमा कर जनक मन्दिर मे टीका ग्रहण कर पुनः राम मन्दिर मे डोला पहुचँता है । साम ४ बजे पुनः राम भगवान को डोला मन्दिर से बाहर निकाल कर नगर परिक्रमा करते हुवे दशरथ मन्दिर, जानकी मन्दिर, लक्ष्मण मन्दिर मे टीका ग्रहण कर पुनः राम मन्दिर मे डोला पहुँच कर सम्पन्न होता है । 

दशमी के चार दिन बाद चौठारी पूजा होती है जिसे भगवती की शुद्ध पूजा माना जाता है ।    


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